Ÿाीसगढ़ के प्रथम विधानसभा में विधायकों की भूमिका

 

डाॅ. सुभाष चन्द्राकर1, डाॅ. तुलेष्वरी धुरंधर2

1दुर्गा महाविद्यालय, रायपुर

2शोध छात्रा, पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय, रायपुर

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राज्यों की व्यवस्थापिका को विधानमण्डल कहते हैं, जो दो सदनों से मिलकर बनता है विधानसभा तथा विधान परिषद, विधानसभा निम्न तथा लोकप्रिय सदन होता है, जिसके सदस्य सार्वजनिक वयस्क मताधिकार के आधार पर निर्वाचित होते है। दूसरा सदन जो विधान परिषद कहलाता है वह विभिन्न निर्वाचक मण्डल द्वारा चुना जाता है तथा कुछ सदस्य राज्यपाल द्वारा मनोनित किया जाता है परंतु Ÿाीसगढ़ में विधान परिषद नहीं है, देश में केवल Ÿान प्रदेश, बिहार, महाराष्ट, कर्नाटक, आन्ध्रप्रदेश, तेलंगाना एवं जम्मू कश्मीर राज्यों में दो सदन है। शेष राज्य एक सदनीय है। विधान सभा से प्रदेश की जनता का संबंध कुछ अथों में प्रत्यक्ष होता है वह उसे जानता है तथा लोककल्याणकारी कार्यों हेतु उससे अपेक्षा रखता है। राज्यों की विधानसभा की संख्या संविधान द्वारा अधिकतम 500 तथा न्यूनतम 60 निश्चित की गयी है, परंतु सिक्किम, मिजोरम, गोवा, अरूणाचल प्रदेश को भौगोलिक एवं सांस्कृतिक विशिष्टता के कारण विशेष छूट दी गई है इन राज्यों की विधानसभा की संख्या 60 से भी कम है। Ÿाीसगढ़ राज्य में विधान सभा सदस्यों की संख्या 90 है। देश के विधानसभाओं में अधिकतम संख्या Ÿार प्रदेश का 403 है न्यूनतम सदस्य संख्या पांडिचेरी 40 (केन्द्र शासित संघीय क्षेत्र) है।

 

ज्ञम्ल्ॅव्त्क्ैरू  Ÿाीसगढ़, प्रथम विधानसभा, विधायकों की भूमिका

 

 

 

 

 

 

 

 

 

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Ÿाीसगढ़ के विधायक: सामान्य परिचय

Ÿाीसगढ़ प्रदेश राजनैतिक दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण प्रदेश है, Ÿाीसगढ़ जनजातिय बहुल, ग्रामीण जन जीवन वाला प्राकृतिक सौंदर्य कृषि व्यवसाय एवं संस्कृति के लिए जाना जाता है। अनेक राष्ट्रीय स्तर के व्यक्तियों ने Ÿाीसगढ़ के विभिन्न विधान सभा क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व अविविभाजित मध्यप्रदेश में किया था, जैसे - ठाकुर प्यारे लाल सिंह, डाॅ. खूबचंद बघेल, बृजलाल वर्मा एवं पं. रविशंकर शुक्ल, द्वारिका प्रसाद मिश्र, पुरूषोŸाम लाल कौशिक, श्यामाचरण शुक्ल, आदि। Ÿाीसगढ़ विधान सभा में विभिन्न परिवेश से सदस्य है, कोई उच्च शिक्षक है, तो कोई अल्प शिक्षित है, कोई राजनीतिक अभिजन वर्ग से है तो कोई सामान्य वर्ग से, विधान सभा सदस्यों में पेशागत विभिन्नता, आयुगत विभिन्नता, शिक्षागत विभिन्नता आदि भी है, सदन में अधिकांश विधायक पहली बार निर्वाचित हुए है, जिनकी संख्या - 60 से अधिक है। 40-50 आयु समूह के विधायक सर्वाधिक है। 45 से कम आयु के विधायकों की संख्या 40 है, अतः यह विधानसभा अपेक्षाकृत युवा सदन है, जिसका विवरण निम्नानुसार है -

 

 

 

तालिका क्रमांक 01-तीन से अधिक बार निर्वाचित माननीय सदस्यों की सूची

 

तालिका क्रमांक 02- छत्तीसगढ़ के प्रथम विधानसभा के माननीय सदस्यों का आयु समूह के आधार पर विवरण

 

 

 

 

 

तालिका क्रमांक 03- छत्तीसगढ़ के प्रथम विधानसभा के माननीय सदस्यों की शैक्षणिक योग्यता के आधार पर विवरण

 

तालिका क्रमांक 04- छत्तीसगढ़ के प्रथम विधानसभा के माननीय सदस्यों के व्यवसाय संबंधी जानकारी

 

तालिका क्रमांक 05- छत्तीसगढ़ के प्रथम विधानसभा के माननीय सदस्यों के परिवार संबंधी जानकारी

 

 

 

Ÿाीसगढ़ की प्रथम विधानसभा में विधायकों की भूमिका

Ÿाीसगढ़ प्रदेश की प्रथम विधानसभा मध्य प्रदेश विधानसभा के पुर्नगठन द्वारा 1 नवम्बर 2000 को अस्तित्व में आया। प्रथम विधानसभा में कुल आठ सत्र सम्पन्न हुआ जिसका विवरण निम्नानुसार है।

 

 

 

तालिका क्रमांक 06

 

 

 

निष्कर्ष

01.     प्रस्तुत शोध आलेख से स्पष्ट है कि प्रथम विधानसभा में 50 से अधिक सदस्य प्रथम बार निर्वाचित हुए है।

02.     प्रथम विधानसभा में महिला सदस्यों की कुल संख्या 06 रही

03.     शोध आलेख से स्पष्ट होता है कि प्रथम विधानसभा में 46 सदस्य 21 से 40 वर्ष आयु समूह से थे। अतः यह सदन युवा सदन था।

04.     प्रथम विधानसभा में कुल 8 सत्रों में 5343 प्रश्न प्रस्तुत किया गया जिसमें 3439 तारांकित एवं 1904 अतारांकित था, जिसमें से 748 प्रश्नों का सदन में Ÿार दिया गया।

05.     प्रथम विधानसभा में Ÿाा पक्ष एवं विपक्षी विधायकों ने अपने क्षेत्र की समस्याओं को सदन में उठाने का प्रयास किया।

 

सुझाव

साक्षात्कार अनुसूची के माध्यम से विधायकों से बातचीत की गयी विषय के अध्ययन एवं साक्षात्कार के माध्यम से विधायकों की अनेक समस्याओं की जानकारी सामने आयी जो सुझाव के रूप में प्रस्तुत है:-

01.     महिलाओं को पंचायती राज में 50 प्रतिशत आरक्षण प्राप्त है। उसी तरह विधानसभा में भी उनको 50 प्रतिशत आरक्षण देने की आवश्यकता है। उसके बिना सदन में महिलाओं की संख्या कभी बढ़ने वाली नहीं है।

02.     विधानसभा में महिला आरक्षण वर्ग अनुसार यथा- अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, सामान्य के आधार पर किया जाना चाहिए।

03.     Ÿाीसगढ़ विधानसभा में महिला विधायकों के लिए अलग से प्रशिक्षण सत्र आयोजित किया जाना चाहिए जिसमें वे भरपुर संसदीय ज्ञान हासिल कर विधानसभा की कार्यवाही में सक्रिय भूमिका निभा सकेंगे सदनीय व्यवहार, बहस एवं बातचीत को शैलियों में पारंगत हो सकेंगे।

04.     सदन में आपसी सामंजस्य एवं सौहार्द बढ़ाने हेतु सदस्यों के मध्य विभिन्न गतिविधियों का होना आवश्यक है। जिसमें महिला सदस्यों को प्राथमिकता मिल सके।

05.     विधानसभा की सभापति तालिका एवं विभिन्न समितियों में महिलाओं को आवश्यक रूप से जगह दी जानी चाहिए।

06.     सभी राजनीतिक दलों के संगठन में महिलाओं को आरक्षण दिया जाना चाहिए।

07.     राजनीतिक दलों को अपना प्रत्यासी चुनते समय अपने मापदण्डों में सुधार करने की आवश्यकता है जिससे सिर्फ राजनीतिक अभिजन वर्ग से प्रत्याशी चुनने की जगह संघर्षशील एवं जुझारू महिलाओं का चुनाव हो सके।

08.     विधायकों में सेवा भावना का नितान्त अभाव दिखाई दे रहा है। कथनी एवं करनी का अन्तर स्पष्ट दिखाई दे रहा है। गाँधी, अम्बेडकर एवं सरदार पटेल का चित्र दीवाल में शोभा बढ़ाने वाली वस्तु बन गये हैं, उनके आचार एवं विचार ग्रहण करने की नितांत आवश्यकता है। अतः हर स्तर के जन प्रतिनिधि हेतु लम्बी अविध के आवासिय प्रशिक्षण की आवश्यकता है।

09.     महिला विधायकों के साथ सभी विधायकों के लिए अनिवार्य शैक्षणिक योग्यता का प्रावधान रखे जाने की आवश्यकता है। जिससे उच्च शिक्षित वर्ग विधान सभा में पहुंच सके।

10.     सामाजिक परिवर्तन हेतु महिलाओं की विधानसभा में अधिकाधिक संख्या में पहुँचना आवश्यक है।

11.     समस्त विधायकों को किसी 04 गांवों को गोद लेना चाहिए जहाँ उसके उसके ससुराल के रिश्तेदार रहते हों, 5 साल तक उन गांवों का विकास का प्रयास करना चाहिए आगामी चुनाव में टिकट का आधार उन गांवों के विकास को रखना चाहिए।

12.     संसदीय गतिरोध या हुड़दंग रोकने हेतु आवश्यक उपाय करने की आवश्यकता है। सदन में कुछ दबंगों के हुड़दंग से पुरा सदन ठप्प हो जाता है, जनता का धन व्यर्थ बह जाता है, कार्यपालिका का विधायिका के प्रति जवाबदेही का सिद्धांत असफल हो जाता है, सरकार बिना किसी जिम्मेदारी के अपने कार्य को साध लेता है।

13.     महिला सदस्यों की विधानसभा की कार्यवाहियों के प्रति उदासीनता दूर करने हेतु निरन्तर प्रशिक्षण एवं मूल्यांकन आधारित व्यवस्था बनाने की आवश्यकता है।

14.     महिला विधायकों को निज सहायक के रूप में संसदीय ज्ञान में पारंगत बुद्धिजिवियों की सुविधा प्रदान करना चाहिए।

15.     छात्र जीवन में छात्र-छात्राओं को संसदीय प्रक्रिया एवं मर्यादाओं का ज्ञान कराया जाना चाहिए। इसके लिए उन्हें विधानसभा की कार्यवाही के अवलोकन का अवसर दिया जाना चाहिए साथ ही प्रत्येक विद्यालय एवं महाविद्यालय में माॅक पार्लियामेंट/युवा संसद का आयोजन किया जाना चाहिए, जिससे वे संसदीय ज्ञान के जानकार बन सकें भारत के संसदीय लोकतन्त्र की बारिकियों को समझ सके।

 

संदर्भ ग्रन्थ सूची

01.     Ÿाीसगढ़ प्रथम विधानसभा की कार्यवाहियों का संक्षिप्त प्रतिवेदन (दिसंबर 2000 से जुलाई 2003)

02.     सदस्य परिचय, Ÿाीसगढ़ प्रथम विधान सभा, Ÿाीसगढ़ विधान सभा सचिवालय 2000

03.     Ÿाीसगढ़ विधान सभा का गठन से विघटन, विधान सभा सचिवालय, जनवरी 2009

04.     चुनाव आयोग की रिपोर्ट मध्यप्रदेश में विधानसभा चुनाव 1998

05.     .. विधानसभा संक्षिप्त कार्य विवरण पुस्तिका 2001,2002,2003

 

 

 

 

 

Received on 14.12.2018                Modified on 09.01.2019

Accepted on 21.02.2019            © A&V Publications All right reserved

Int. J. Rev. and Res. Social Sci. 2019; 7(1):44-48.